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Benefits Of Eating Organic Vegetables & Fruits जैविक (सेंद्रिय) फल और सबजी खाने के फायदे

हेल्थ का सीधा रिश्ता डाइट से है। हेल्दी रहने के लिए लोग अब तेजी से ऑर्गैनिक फूड अपना रहे हैं। इसे सेहत के लिहाज से काफी अच्छा माना जाता है। ऑर्गैनिक फूड के तमाम पहलुओं के बारे में एक्सपर्ट्स से बात कर जानकारी दे रहे हैं जीवनसत्व ऑर्गैनिक फार्म के डायरेक्टर मिसेस शुभांगी देशमुख

कैसे पहचानें ऑर्गैनिक
बाजार में तमाम तरह के फल और सब्जियां उपलब्ध हैं, जो देखने में कुछ ज्यादा ही फ्रेश लगते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे ऑर्गैनिक हैं। ऑर्गैनिक फूड आइटम्स सर्टिफाइड होते हैं या छपे होते हैं। इन पर सर्टिफाइड स्टिकर्स लगे होते हैं या छपे होते हैं। इनका स्वाद भी नॉर्मल फूड से थोड़ा अलग होता है। ऑर्गैनिक मसालों की गंध नॉर्मल मसालों की तुलना में तेज होती है। इसी तरह ऑर्गैनिक सब्जियां गलने में ज्यादा टाइम नहीं लेतीं। जल्दी पक जाती हैं।

ये हैं खासियतें

ऑर्गैनिक फूड्स में आमतौर पर जहरीले तत्व नहीं होते क्योंकि इनमें केमिकल्स, पेस्टिसाइड्स, ड्रग्स, प्रिजर्वेटिव जैसी नुकसान पहुंचाने वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। आम फूड आइटम्स में पेस्टिसाइड्स यूज किए जाते हैं। ज्यादातर पेस्टिसाइड्स में ऑर्गेनो-फॉस्फोरस जैसे केमिकल होते हैं, जिनसे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

जीवनसत्व के ऑर्गैनिक फार्म्स में उपजाए जाने वाले फलों और सब्जियों में ज्यादा ऐंटि-ऑक्सिडेंट्स होते हैं क्योंकि इनमें पेस्टिसाइड्स नहीं होते इसलिए ऐसे पोषक तत्व बरकरार रहते हैं जो आपकी सेहत के लिए अच्छे हैं और आपको बीमारियों से बचाते हैं।


ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और स्किन में निखार लाने में मदद करते हैं। ये शरीर में चर्बी नहीं बढ़ने देते क्योंकि ऑर्गैनिक फूड को प्रोसेस्ड करते वक्त सैचुरेटेड फेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इनसे मोटापा नहीं बढ़ता। ये सुरक्षित भी लंबे समय तक रहते हैं।

कीमत क्यों ज्यादा

ऑर्गैनिक फूड आइटम्स की पैदावार नॉर्मल फूड आइटम्स के मुकाबले कम है और मांग ज्यादा है इसलिए बाजार में इनके रेट नॉर्मल फूड आइटम्स के मुकाबले ज्यादा होते हैं। आमतौर पर ज्यादातर किसान जैविक खेती की बजाय पारंपरिक तरीके से ही खेती करते हैं। इसके अलावा इनका सर्टिफिकेशन भी महंगा होता है और सब्सिडी भी नहीं मिलती। लेकिन ध्यान रखें कि बरसों तक खाने में पेस्टिसाइड और केमिकल्स खाने के बाद खराब होने वाली सेहत के सामने ऑर्गैनिक फूड की कीमत ज्यादा नहीं है।

ऐसे बढ़ें ऑर्गैनिक की ओर

अक्सर लोग चाहकर भी ऑर्गैनिक फूड्स शुरू नहीं कर पाते। वजह फेवरिट ब्रैंड का स्वाद, पास की ग्रॉसरी शॉप पर इन फूड आइट्म्स का उपलब्ध न होना और महंगा होना आदि हो सकती है। आप इन आसान स्टेप्स को अपना कर ऑर्गैनिक सफर शुरू कर सकते हैं:-

पूरी ग्रॉसरी लिस्ट को बदलने की न सोचें। थोड़े से शुरू करें। मसलन पहले चावल से शुरू करें। रेड, ब्राउन या बिना पॉलिश वाला, कोई भी चावल चुनें और हफ्ते में कम-से-कम 2 बार यह वाला चावल खाएं। फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ा दें। ब्राउन राइस ज्यादा पौष्टिक होता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराता है। यह वजन कम करने में भी मदद करता है। इसी तरह वाइट शुगर के बजाय गुड़, शक्कर या खांड का इस्तेमाल शुरू करें। इनमें आयरन ज्यादा मात्रा में होता है और रिफाइन नहीं होने की वजह से ये हेल्थ को नुकसान भी नहीं पहुंचातीं।

मौसमी हरी सब्जियों जैसे कि पालक, मेथी, चौलाई, पुदीना, धनिया आदि से शुरू करें। मौसमी होने की वजह से इन्हें खाना यूं भी सेहत के लिए अच्छा है।

जीवनसत्व ऑर्गैनिक को अपनी पूरी लाइफस्टाइल में शामिल करें। प्राकृतिक साबून, भीमसेन अगरबत्ती, गौ माता के गोबर से बने उबले, गौमृत, भीमसेन कपूर को शुमार करें। अगर बाल कलर करते हैं तो केमिकल-फ्री प्रॉडक्ट यूज करें। इस तरह आप शरीर पर केमिकल के लोड को कम कर पाएंगे।

अपने खानपान में हल्का बदलाव करके भी आप ऑर्गैनिक लाइफ की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

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क्या आप जानते हे कोनसे महिने में पानी कैसे पीना है…

पानी हम इंसानों के लिए प्रकृति का अनमोल उपहार है। हम पानी के बिना अपने दैनिक जीवन का नेतृत्व नहीं कर सकते। जीवित रहने के लिए सभी मनुष्यों, जानवरों और पौधों के लिए पानी आवश्यक है। पानी को बचाना और संरक्षित करना एक आवश्यकता बन गयी है क्योंकि पृथ्वी पर ताजे पानी की मात्रा बहुत कम है। बारिश ना होने के कारण पीने के पानी की मात्रा कम हो रही है। इसलिए सरकार सभी को पर्याप्त मात्रा में मीठे पानी की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं है।

आप पानी के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। पानी पीना बीमारी के लिए एक बेहतरीन उपाय है। डॉक्टरों के अनुसार रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। हर चीज के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। अगर ठीक से ईसका पालन नहीं किया गया तो स्वास्थ्य के लिए ये हानिकारक हो सकता है।

जानिए पानी पिने की सही विधि के बारे में

जून से सितंबर तक – तांबे के बर्तन का पानी पीना चाहीये इससे जंतुविरहीत पानी मिलता हे

अकतुबर से जनवरी तक – स्टील या पितल के बरतन मे सोने की कोई भी चीज डालकर पानी पीजीए इससे उष्णता मिलेगी

फरवरी से मई तक – मिटटी के मटके मे पाणी पीए इससे शीतलता मिलेगी

 

Do you know how to drink water in which month…

 

Water is a priceless gift of nature to us humans. We cannot lead our daily life without water. Water is essential for all humans, animals and plants to survive. Conserving and conserving water has become a necessity as the amount of fresh water on the earth is very less. Due to lack of rain, the quantity of drinking water is decreasing. So the government is not able to supply fresh water in sufficient quantity to all.

 

You cannot imagine your life without water. Drinking water is one of the best remedies for illness. According to doctors, it is recommended to drink at least 8 to 10 glasses of water daily. Everything has its advantages and disadvantages. It can be harmful to health if not followed properly.

“Learn about the right way to drink water”

From June to September – Copper pot water should be drunk as it provides sterile water

October to January – Drink water by putting anything golden in a steel or brass pot

From February to May – drink water in an earthen pot, it will give coolness

 

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Punarnava (Ayurvedic Plant)

One Of The Best Ayurvedic Plant Punarnava

Punarnava Benefits :
पुनर्नवा एक ऐसी औषधि है जो कई प्रकार के रोगों को शरीर से दूर रखने और उनके उपचार में भी मदद करती है। इसका सेवन करने वाले लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी बचते हैं। आमतौर पर जड़ी-बूटी के रूप में पाया जाता है लेकिन इसे टेबलेट और पाउडर के रूप में सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा खरीदा जाता है। इस कारण इसका सेवन करने में काफी मदद मिलती है और लोग इससे लाभदायक परिणाम भी प्राप्त करते हैं। नीचे जानिए पुनर्नवा औषधि आपको किन-किन रोगों से बचाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।

एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं पुनर्नवा पाउडर , इन रोगों का है रामबाण इलाज

  • ​1) हृदय रोगों से बचाए …
  • ​2) यूरिन इन्फेक्शन से बचाए …
  • ​3) पौरुष शक्ति को मजबूत करे …
  • 4) ​किडनी रोगों से बचाने में मदद करे …
  • ​5) ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करे …
  • 6) एंटी एजिंग गुण

आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव

पुनर्नवा शोथहर, शीतल, हृदयोत्तेजक, शूलहर तथा मूत्रल है। इसका प्रयोग शोथ रोग, हृदय रोग, जलोदर, पांडु और मूत्रकृच्छ्र तथा वृक्क-विकारों में किया जाता है।  इसका विशिष्ट प्रभाव गुर्दों और मूत्रवह संस्थान पर पड़ता है। इसलिए यह मूत्रल और शोथहर है। यह रक्तवहसंस्थान और हृदय पर भी अच्छा असर डालती है।

यह मूत्रल, शोथघ्न, विषघ्न, हृद्य, रसायन दीपन, व्रणरोपक, व्रणशोथपाचन, वृष्य, रक्तभारवर्धक, अनुलोमन, रेचन, कासघ्न, स्वेदजनन, कुष्ठघ्न, ज्वरघ्न तथा मेदोहर है। पोटैशियम नाइट्रेट की उपस्थिति के कारण यह हृदय की मांसपेशियों की संकुचन क्षमता को बढ़ाता है। दूसरी मूत्रल औषधियाँ जहां शरीर में पोटैशियम नाइट्रेट की मात्रा का ह्रास करती हैं, वहीं पुनर्नवा मूत्रल होने के साथ-साथ पोटैशियम प्रदायक है।

रक्त पुनर्नवा तिक्त, कटु, शीत, रूक्ष, लघु, कफपित्तशामक, वातकारक, रुचिकारक, अग्निदीपन, ग्राही, शोथघ्न, रसायन, रक्तस्भंक, व्रणरोपण तथा मलसंग्राही होता है।

यह शोफ, पाण्डु, हृद्रोग, क्षत, शूल, रक्तप्रदर, कास, कण्डू, रक्तपित्त, अतिसार, रक्तविकार तथा उदररोग नाशक होता है।